भक्त के लिए अपना हृदय खोल देते हैं भगवान: मृदुलकृष्ण महाराज,पांचवे दिन 70 हजार ने सुनी भागवत कथा
श्रीमद्भागवत के दसवें स्कंद्ध में उल्लेख है कि भगवान अपने भक्त के लिए अपना हृदय भी खोल देते है। जब भक्त प्रभु के चरणों का आश्रय ले लेता है तब भगवान अपने भक्त के लिए के केवल अपनी आंख, वाणी, कान ही नहीं खोलते अपितु उसके लिए अपना हृदय भी खोल देते हैं। हनुमान चालिसा में लिखा है कि जो भगवान के चरित्र को वर्णन करता है भगवान उसके हृदय के भी रसिया हो जाते हैं। भक्ति हमें प्रभु के शरणागत होना सिखाती है। वृंदावन की भूमि भक्ति प्रधान है, मथुरा की भूमि ज्ञान प्रधान है, द्वारिका की भूमि एश्वर्य प्रधान है। यह सद्विचार आचार्य मृदुलकृष्ण महाराज बंजारी दशहरा मैदान में कर्मश्री संयोजक विधायक रामेश्वर शर्मा और श्री बांकेबिहारी सेवा समिति के संयुक्त संयोजन मे आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में पांचवे दिन की कथा सुनाते हुए व्यक्त किए। इस दिन की कथा में उन्होने श्रीकृष्ण की बाललीलाओं का सुंदर चित्रण किया और माखनचोरी, गौचारणलीला, कालिया मर्दन, गिरीराज पूजन की कथा सुनाई। आचार्यश्री भक्ति की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जिस प्रकार से भक्त के हृदय में भगवान का दर्शन होता है उसी प्रकार से भगवान के हृदय में भी भक्त के दर्शन होते है। मृदुलजी द्वारा इस दिन श्रीकृष्ण की बाललीलाओं के वर्णन के साथ जब बालगोपाल की सखाओं संग माखनचोरी की झांकी प्रस्तुत की तो हर सख्श इस अलौकिक लीला में शामिल होकर भावविभोर हो गया। मारे खुशी के श्रोताओं के अश्रु छलक पड़े। गौरतलब है कि पांचवे दिन 70 हजार से अधिक श्रोताओं ने कथा पंडाल में बैठकर कथा सुनी।कथा के पांचवे दिन ‘‘मेरो गोवर्धन महाराज...महाराज, तेरो माथो मुकुट विराज रह्यो...’’ की स्वरलहरियों के साथ कथा मंच पर भगवान को 56 भोग लगाया गया। आचार्यश्री ने भजन और मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत रूप से बांकेबिहारी को 56 भोग लगवाया। आयोजन समिति के संयोजक विधायक रामेश्वर शर्मा ने सपत्निक भगवान को 56 भोग समर्पित किया। इस अवसर पर गुफा मंदिर के महंत चंद्रमादास त्यागी, डीआईजी रमनसिंह सिकरवार, यजमान अशोक चतुर्वेदी ने सपत्निक, अग्रवाल ग्रुप के चेयरमेन सुधीर अग्रवाल, मध्यप्रदेश मेट्रो के ईएनसी जितेन्द्र दुबे, अविनाश शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों-अधिकारियों ने पूजन अर्चन के साथ भगवान को 56 भोग समर्पित कराया और संध्या आरती में भाग लिया।बुधवार को कथा के दौरान श्रीकृष्ण की बाललीलाओं के एक से बढ़कर एक मनमोहक झांकियां प्रस्तुत की गई। माखनचोरी की झांकी, नटखट ग्वालों संग झांकी सहित 56 भोग की झांकी प्रस्तुत की गई। झांकियों का प्रस्तुतिकरण ऐसा जीवंत था कि कथा पंडाल में बैठे 70 हजार श्रोता मंत्रमुग्ध होकर भक्ति की मस्ती में भावविभोर हो गए। अद्भुझ झांकियों पर अलौकिक आनंद का अनुभव करते भक्तों के अश्रु छलक उठे।

No comments:
Write comments